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swatishukla.rediffiland.com/
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Aakhir kab?
कुछ आवाज़ें आती हैं दिल से, धड़कनो के साथ, और बड़ती जाती है, बन जाती हैं शोर,
मेरा मन कुछ खुला कुछ ढका सा, जैसे एक उजली चादर, दुखों को ढकना चाहती है, पर हर कोशिश मे पैर खुले रह जाते हैं, सबको साथ रखना चाहती है, पर कुछ हाथ पीछे छूट जाते हैं, थमना चाहती हूँ आँसुओं को, पर खुद के आँसुओं को थामने के लिए भी मेरे हाँथ छोटे हैं, भरोसा है, पर पता नही किस पर, आँखें हर बार हथेलियों को देखती हैं, की कब लकीरें बढ़े और आसमा को बंद कर लें, कब मेरे हाथ बढ़े और जहाँ को थाम लें, कब मेरे आँसू दुनिया को ठंढक पहुचाएं, कब मैं फूलों से कांटो को अलग कर सकूँ, कब मैं दुनिया में सिर्फ प्यार भर सकूँ, कब फैलेगी वो खुशबू जिसमे सब भीग जाएँ, कब होगा वो जादू जो इंतजार खत्म कराए, पर मेरे सपने आज भी सवाल छोड़ जाते हैं,
कि कब ? आखिर कब ?
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yaadein
जिंदगी के सफर मे जब हम दूर निकल जाते हैं, कुछ पल जो बीत जाते हैं, याद आते हैं, वो बिना बात के हसना, किसी और के आँसुओं मे रोना, हर छोटी बात पर चिढाना, प्यार से एक दूजे को गले लगाना, याद आता है, वो आंखो की चमक, वो चेहरे की लाली, वो झिटकने वाली मीठी सी गाली, याद आती है, हर लम्हे की जंग, वो जीत का रंग, याद आता है, वो बारिश मे भीगते हुए घर जाना, और कॅंटीन मे समोसो की शर्ते लगाना, याद आता है, एक दूसरे का रूठना मनाना, और मानने पर मक्डोनाल्ड्स की मौज उड़ाना, याद आता है, वो क्लास मे मेकप किट के लिए झगड़ना, और जूनियर्स के सामने तोड़ा अकड़ना, याद आता है, वो क्लास मे चीख-चीख कार गाना, और लंच मे टिफिन लूटकर खाना, याद आता है, वो साइकल की रेस, और पीछे रहने वाले का प्यारा सा फेस, याद आता है, वो हर प्यारे लम्हे को महकना, और शरारत कार तितलियों सा उड़ जाना याद आता है, बहुत याद आता है................................ KUCH PAL JO KHOOBSURAT HOTE HAI........ APNI TAAJGI SE HUME MAHKATE HAI....... HUM CHAHE KITNE BHI DOOR HO...... PAR DOSTI KE DIN HUMESHA YAAD AATE HAI... ITS ALL HERE FROM MY SCHOOL DAY'S.........
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EHSASS
तेरी आँखों मे मेरे ख्वाब नज़र आते हैं, जब भी मैं कुछ कहूँ तो बस तेरे ही अल्फाज़ नज़र आते हैं, ये कोई तिलिस्म है या बस हमारे रिश्ता, की मेरी हर धड़कन मे तेरे ही साज नज़र आते हैं, तुझसे मैं हूँ या मुझमे हो तुम बसी, मेरी साँसों से जुड़े तेरे दिल के तार नज़र आते है, जब भी ये आँसू मेरी आँखों को सताते हैं, तेरे आँचल की ठंढक से मेरी मुस्कान नज़र आते है, तुम्हे मैं माँ कहूँ या बस एक ठंडी हवा, की मेरे सारे दर्द तेरी पनाह मे घुल जाते हैं, तेरी आँखों मे मेरे ख्वाब नज़र आते हैं...............................
- स्वाति
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THANK U
A tub full thank to all of u guys for liking my views, please do wear a beautiful smile on ur faces bcoz ur smiles can make someone smiling so keep visiting my iland & keep smiling. urs friend******** swati....
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udaan
मेरे हौसलों की उड़ान आँधियों के संग आई है, तुम ये ना समझो की इनमें सिर्फ अलफाजों कि गहराई है, ये तो मेरे अश्क़ है जिन्होने हवाओं को पुकारा है, ये सिर्फ ठंडी बूंदे नही मेरे जीने का सहारा है, हर झोके को बस एक मुस्कुराहट का इंतजार होता है, और हर मुस्कुराहट से मेरे हौसलों का आंगन गुलजार होता है, हर एक बूँद प्यासी मिट्टी से मिलकर एक खुशबू छोड़ जाती है, और कुछ पाने का एहसास दे मेरे मन को महकती है, मैं इन बातों को सिर्फ एहसास न कहती, क्यों कि ये तो वो फरिश्ता है, जो मुझमे उड़ान जगाती है, जो मुझे जीतना सिखाती है.........................................
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LAXMI KA PYAR
EK din maa Laxmi ho kamal par sawar, nikli the batane vishv me amit pyar, ddevi ke pyar ko vishv ne nakara, kaha laxmi pane ka yehi su-awasar sara, aakhir sab ko hai kewal dhan se pyar, to kaun kare laxmi ke is pyar ko sweekar, laxmi ki bas yehi bhool the, dena chaha usne is lobhi sansar ko pyar, par iske liye to koi na tha tyarr, sabko to cahiye keval dhan apar, aakhir thak-kar devi ne ek manav se poocha, kyon karte hai sab dhan se itna pyar, kya unhe nahi chahiye sukh shanti apar, manav krodhit hua kuch chidchidaya man me kuch badbadaya, kuch der me bola mukh ke dwar khola, kaha pahle nikalo hazar phir batata hoon manav kyon karta haidhan se itna pyar, devi ne manav ki vo raashi deni padi saath hi vishv ki ek seekh leni padi, jo karta hai sukh aur shanti se pyar, use milte hai gole barood aur bom hazaar, aur jo karta hai dhan se pyar uske liye khule hai vishv ke sabhi dwaar saath hi pyar apar, devi ne kaha pyar to hai geevan ka saar, lekin yahan to dhan hi hai sabka adhar, dhan ka moh tyag jab mujhe karoge sweekar tabhe main aaungi lakar amit pyar.......
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pahchaan
पहचान रेत पर चलकर बने चिन्हो मे मेरी जान है, बस यही पहचान है, क्यों भरे थे कल्पना की तूलिका मे रंग मैने, अब इन्ही रंगो के वीराने मे मेरी जान है बस यही पहचान है, रंगो के इंद्रधनुष से तो कब का नाता टूट गया, अब तो आंखो से निकलते अश्रु ही मेरा मान है बस यही पहचान है, उम्मीद की छोटी किरण और मन का गुलिस्ता खिल उठा, टूटे सपनो से चुभे नश्तर ही मेरा मान है बस यही पहचान है, आँधियों के संग कुछ तिनके भी उड़कर आ गये, इन तिनको को भी खूदपर मुझसे ज्यादा गुमान है, बस यही पहचान है, अश्क़ आंखो मे सजे और सांसो मे तूफान है, बस यही पहचान है, देह से तो कब की जा चूकि है मेरी आत्मा, अबतो सांसो से ही मेरी जान का अनुमान है बस यही पहचान है, मन में उठती आँधियों की धुंद में हूँ खो चुकी, अब तो सांसो की वो अन्तिम किस्त ही अंजाम है बस यही पहचान है........................ बस यही पहचान है...........................................
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Desire
I Desire I desire a big-big heart, a ralish soul & alot of thust, I desire to be the biggest one, the sizzeling wind & the shiny sun, I desire to rock the world, to hug the sky & to kiss the earth, I desire no more tears, no more splashes & no more crush, thus, Idesire to make a beautiful world, the nature are there & humanity rebirth. -SWATI
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